Free Hindi Book Andhere Ke Gunah In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
रात का समय था और जंगल की गहराइयों में एक भयावह सन्नाटा पसरा हुआ था। घने पेड़ों की छांव और दूर-दूर तक फैला अंधेरा पूरे इलाके को रहस्यमय बना रहा था। कहीं दूर से उल्लुओं की आवाजें और पत्तियों की हल्की सरसराहट ही सुनाई दे रही थी, जैसे जंगल किसी गहरे रहस्य को छिपाए हुए था। चाँद की हल्की-सी रोशनी घने बादलों के बीच में झांक रही थी, और इस मिलीजुली रोशनी ने जंगल को और भी डरावना बना दिया था।
हाइकिंग पर निकला समूह थका हुआ और निराश लग रहा था। उन्होंने कई घंटे जंगल की तंग राहों को पार किया था, लेकिन अब लग रहा था कि वे अपने रास्ते से भटक गए हैं। उनके चेहरों पर चिंता और थकावट साफ नजर आ रही थी। समूह के कुछ सदस्य जमीन पर अपनी लाठियों से खटखट करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो कुछ अपने चारों ओर की भयानक सन्नाटे को देखकर कांप रहे थे।
एक सदस्य ने परेशान होकर कहा, "हमने लंबा रास्ता तय किया है, लेकिन अब रास्ता खो गया है। हमें किसी तरह मदद की जरूरत है, नहीं तो हम यहाँ पूरी रात फंसे रह जाएंगे।"
समूह का नेता, एक अनुभवी हाइकिंग गाइड, थोड़ा झुक कर अपने फोल्डर से नक्शा निकालता है और उसे ध्यान से देखने लगता है। उसकी भौंहें चढ़ती हैं, जैसे उसे समझ नहीं आ रहा कि वे कहां हैं। नक्शे में बार-बार नजर डालने के बाद भी, वह उन्हें सही दिशा बताने में असमर्थ दिख रहा था।
समूह एक गहरी खाई की ओर बढ़ रहा था। जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते गए, अंधेरा और भी घना होता गया। पेड़ों की शाखाओं के बीच से छनकर आती हुई चाँद की हल्की रोशनी अब गायव हो चुकी थी, और काले बादलों ने आकाश को पूरी तरह से घेर लिया था। खाई के निचले हिस्से में पहुंचते ही उनकी निगाहें उस भयानक दृश्य पर पड़ी, जिसने उनके दिलों को दहला दिया।
मिट्टी के ढेर के बीच, एक शव का खोपड़ी बाहर निकला हुआ था। उसका सिर मिट्टी में आधा दफन था, जैसे किसी ने जल्दबाज़ी में उसे छुपाने की कोशिश की हो। खोपड़ी के चारों ओर ताजा खून के धब्बे थे, जिनसे यह माफ जाहिर हो रहा था कि मौत कुछ ही समय पहले हुई थी। शव की हालत इतनी भयानक थी कि उसकी पहचान करना मुश्किल था।
सदस्य (हैरान होकर, भय से कांपते हुए): "यह... यह क्या है? किसी ने इसे यहाँ छुपाने की कोशिश की है। और देखो, खून अभी तक सूखा भी नहीं है।"
उनके शब्द हवा में गूंज उठे, और अचानक जंगल की शांति को एक हल्की ठंडी हवा ने तोड़ दिया। हवा की सरसराहट पेड़ों के पत्तों में गूंजने लगी, और उसके साथ ही हवा में एक अजीब-सी ठंडक फैलने लगी। हरे-भरे पेड़ों के बीच छाया हुआ सन्नाटा अब और भी डरावना हो गया था। ऐसा लग रहा था मानो पूरा जंगल उस शव की उपस्थिति से डर गया हो।
एक सदस्य ने धीरे-धीरे अपने हाथ से मोबाइल निकालकर शव के पास रोशनी डाली। बाकी लोग भी अपने मोबाइल और बैटरी से चलने वाली लाइट्स जलाने लगे, पर उस अंधेरे में रोजनी की किरण भी उन्हें और भयभीत कर रही थी। हर किसी के चेहरे पर उलझन और हर साफ झलक रहा था। शव की भयानक स्थिति, चारों ओर फैले खून के निशान, और उस अंधेरे का घनत्व यह सब मिलकर दृश्य को बेहद रहस्यमय बना रहे थे।
सदस्य (घबराई हुई आवाज़ में): "हमें यहाँ से निकलना होगा। यह जगह सही नहीं है... कुछ बहुत गलत हुआ है यहाँ।"
लेकिन एक सदस्य, जो अब तक चुपचाप शव को देख रहा था, उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। उसने शव के पास घुटनों के बल बैठते हुए मिट्टी को हाथों से खुरचा। उसकी उंगलियों खून और मिट्टी से गंदी हो चुकी थीं, लेकिन वह मानो किसी महत्वपूर्ण चीज की तलाश में था।
(धीरे से, सोचते हुए): "इसका मतलब कुछ तो है... ये शव यहाँ यूं ही नहीं है। ये छुपाया गया है, और शायद इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो।"
बाकी सदस्य अब पूरी तरह से सहमे हुए थे। कोई कुछ नहीं कह रहा था, लेकिन सभी के चेहरे पर डर और बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। हवा अब और तेज चलने लगी थी, और पेड़ों की शाखाएं हिल-हुल रही थीं। दूर से उल्लुओं की आवाजें आ रही थीं, जो पूरे माहौल को और भी रहस्यमय बना रही थीं।
एक सदस्य ने कांपती हुई आवाज़ में कहा, "यहाँ और रुकना सही नहीं है। हम पुलिस को बुलाते हैं... यह मामला हमारे बस का नहीं है।"
लेकिन दूसरे साथी ने उसे रोकते हुए कहा, "नहीं... अगर हम पुलिस को बुलाते हैं, तो हो सकता है कि वे हमें ही इसमें घसीट लें।"
समूह के बाकी लोग एक-दूसरे की ओर देखते रहे, किसी के पास कोई जवाब नहीं था। सत्राटा फिर से छा गया, लेकिन इस बार हवा की सरसराहट के साथ एक अजीब सी बेचैनी भी महसूस हो रही थी।
सदस्य (डरे हुए स्वर में): "अगर यहाँ कुछ बड़ा हुआ है, तो हमें सच में जल्द से जल्द यहाँ से निकलना चाहिए... हमें खुद को खतरे में नहीं डालना चाहिए।"
जैसे ही ये शब्द उसके मुँह से निकले, एक तेज़ बिजली चमकी और आसमान में गड़गड़ाहट की आवाज़ गूंजी। कुछ पल के लिए पूरा जंगल उस चमकदार रोशनी से नहाया हुआ लगने लगा, और उस रोशनी में शव और भी स्पष्ट दिखने लगा। जैसे ही बिजली की चमक खत्म हुई, अंधेरा और भी घना हो गया, और सबके दिलों में डर और रहस्य का मिश्रण और गहरा हो गया।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
|---|---|
| Name of Book: | अंधेरे का गुनाह | Andhere Ke Gunah |
| Author: | Deepak Trivedi |
| Total pages: | 41 |
| Language: | हिंदी | Hindi |
| Size: | 13.2 ~ MB |
| Download Status: | Available |
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