तुम्हारे लौटने पर एवं अन्य प्रेम कविताएँ | TUMHARE LOUTNE PER EBAM ANYA PREM KABITAYEN HINDI BOOK PDF DOWNLOAD

Tumhare Loutne Per Ebam Anya Prem Kabitayen In Pdf Download

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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

जब हम जीवन के युवावस्था में प्रवेश करते हैं तो अमूमन यह अवश्य होता है कि हमें प्रेम की पहली अनुभूति होती है और हम उसके उन्माद में उन्मत्त हो जाते हैं। सूर्य रूपी प्रेम की यह पहली किरण हमारे नग्ग्र चेहरे को चूमती है और हम अथाह खुशी से झूम उठते हैं। फिर धीरे-धीरे यह प्रेम हमें बदलने लगता है, हमें रूपांतरित करने लगता है और यह बदलाव, यह रूपांतरण, प्रेम की हमारे जीवन में उपस्थिति के अनुरूप ही होता है; जैसा प्रेम वैसा ही बदलाव, वैसा ही रूपांतरण। यानी यदि प्रेम में उतावलापन है तो बदलाव विषम होगा और यदि प्रेम में ठहराव है तो बदलाव अनुकूल होगा।

प्रेम के मार्फत यह बदलाव मुझमें भी आया और जैसा प्रेम मिला वैसा ही मुझमें रूपांतरण हुआ। मैंने जिस प्रेम का अनुभव किया; उसमें अथाह आवेग, उतावलापन और उन्मत्तता थी। मैं रूपांतरित होने लगा और मैं रूपांतरण की इस हद तक चला गया कि जीवन क्या है? यह भूल गया, प्रेम को लेकर मेरे मायने बदल गए, एक अजीब सी बेचैनी ने मुझे घेर लिया और मैं किसी लक्ष्यविहीन मनुष्य की तरह यहां-वहां भटकने लगा। यह भटकाव मुझे इतना लील गया कि यह दुनिया मुझे किसी अंधेर कमरे की भांति प्रतीत होने लगी। जहां मुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता; यहां तक कि मैं खुद भी नहीं। खुद को न देख पाना हमारी अंतर्मन की सबसे बड़ी हार है। मेरा अंतर्मन हार चुका था और मैं इतना वेवस और असहाय था कि मैं अपने अंतर्मन को सांत्वना तक नहीं दे पा रहा था। क्योंकि मेरे पास ऐसा कुछ नहीं था जिसके सहारे मैं अपनी अंधेर दुनिया में एक दीपक जला सकूं और अथाह अंधेरे का सामना कर सकू।

हालांकि मेरे अंधेर रूपी दुनिया में कुछ ऐसा था जिसे मैं महसूस कर पा रहा था। जिनके महसूस कर लेने से मेरे अंतर्मन को अथाह शक्ति मिली; उन्हें लोग कविताएँ कहते हैं। कविताएँ जो कि नितांत व्यक्तिगत होती हैं, लेकिन समग्रता में हर उस व्यक्ति को ऊर्जान्वित और प्रफुल्लित करती हैं; जिन्हें वे हृदय और अपने अंतर्मन से महसूस करते हैं। यह कविताएँ ही हैं जो मेरे अंतर्मन से कहती हैं कि "प्रेम तुम्हारे ही भीतर मौजूद है उसे महसूस करो और इतना करने भर से तुम फूल की तरह खिल उठोगे।" कविताओं की यह बात मेरे अंतर्मन को अनवरत रूप से अंधेर कमरा रूपी इस दुनिया में दीपक प्रज्वलित करने के लिए प्रेरित करती है। यह कविताएँ ही हैं जो हमें मनुष्य बनाती हैं। ताकि हम स्वयं के साथ-साथ इस दुनिया को भी महसूस कर पाने में सक्षम हों। ~ विशेक

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:तुम्हारे लौटने पर एवं अन्य प्रेम कविताएँ | Tumhare Loutne Per Ebam Anya Prem Kabitayen
Author:Bishek
Total pages:49
Language: हिंदी | Hindi
Size:0.6 ~ MB
Download Status:Available


Tumhare Loutne Per Ebam Anya Prem Kabitayen written by Bishek | Ebook size 0.6 MB | Includes 49 Pages | Find the free PDF download link of “Tumhare Loutne Per Ebam Anya Prem Kabitayen” below and read it right away.

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