अनुभूत यंत्र मंत्र तंत्र और टोटके | ANUBHUT YANTRA MANTRA TANTRA AUR TOTKE HINDI BOOK PDF DOWNLOAD

Anubhut Yantra Mantra Tantra Aur Totke

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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

शब्दो नित्यः आकाशगुणत्वात्

अर्थात् शब्द नित्य है, आकाश (आश्रय) गुण के कारण। शब्द कभी मरता नहीं, मिटता नहीं, समाप्त नहीं होता, इसमें विकृति नहीं आती, यह तो शाश्वत है, अजर है, अमर है। आज के वैज्ञानिक महर्षि जैमिनि की इस बात को मानने के लिए बाध्य हैं। रेडियो किरणों व बेतार के आविष्कारक मार्कोनी ने शायद महर्षि की इस बात को जड़ से पकड़ा होगा और उसी के माध्यम से हम हज्जारों मील दूर उच्चारित शब्द को ज्यों का त्यों (As it is) सुनते हैं, तत्काल सुन सकते हैं, तथा वर्षों बाद भी सुन सकते हैं। इससे प्रमाणित है कि शब्द कभी विकृत नहीं होते, कभी मरते नहीं। आकाश में प्रसारित ईथर किरणों के माध्यम से शब्द प्रतिपल वितरित होते रहते हैं।

न्याय दर्शन के विद्वान्' शब्द' को प्रमाण मानते हैं। परन्तु कौन-से शब्द ? साधारण बोलचाल के शब्द नहीं, कौतुकवश, आनन्दवश किया गया वाक्य-विन्यास नहीं, दैनिक बोलचाल की भाषा नहीं! न्यायदर्शनकार कहते हैं- आप्तवाक्यं शब्दः अर्थात् आप्तजनों के मुख से निःसृत वचन ही प्रमाण हैं। अब प्रश्न उठता है, आप्त कौन ? आप्त वाक्य की व्याख्या बड़ी लम्बी-चौड़ी है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है- आकांक्षा, योग्यता और सान्निध्य से युक्त पदों का समूह वाक्य कहलाता है और ये वाक्य लौकिक व वैदिक भेद से दो प्रकार के माने गये हैं। वैदिक वाक्य को ईश्वरीय वाणी के रूप में मानकर उसे शब्द प्रमाण के अन्तर्गत स्वीकार किया है। यथा-वैदिकमीश्वरोक्तत्वात् सर्वमेव प्रमाणम्, और ये ही वैदिक वाक्य वेदों में मन्त्र रूप से मुखरित हुए हैं। फलतः मन्त्र स्वयं अपने आप में प्रमाण है। मन्त्र शाश्वत है, अजर है, अमर है। इस बात को किसी और ढंग से प्रमाणित करने की अलग से आवश्यकता नहीं रह जाती।

मन्त्र क्या हैं? मन्त्र किसे कहते हैं और मन्त्र का स्वरूप कैसा होता है?

मन्त्र+अच् निर्मित मन्त्रः शब्द का अर्थ होता है किसी भी देवता को सम्बोधित किया गया वैदिक सूक्त या प्रार्थनापरक वेद मन्त्र'। यही कारण है कि वेद से इतर प्रयुक्त आप्तवाक्यों, जैसे (श्रीमद्भगवद्‌गीता इत्यादि) को मन्त्र नहीं कहा जाता। प्रार्थना-परक यजुस् जो कि किसी देवता को उद्दिष्ट करके बोला गया हो, यथा (ॐ नमः शिवाय) इत्यादि भी मन्त्रों की संख्या में आते हैं। कालान्तर में अनेक प्रकार के तान्त्रिक श्लोक जो कि विशिष्ट देवता को उद्देश्य करके बोले गये तथा विशेष चमत्कारिक शक्ति से सम्पन्न होने से, वे श्लोक भी मन्त्र कहलाने लगे।

शाक्त और तान्त्रिक सम्प्रदायों में प्रयुक्त अनेक सूक्ष्म और रहस्यमय शब्दखण्डों और अक्षरों को यथा- 'ऐं ह्रीं क्लीं' को भी 'मंत्र' कहते हैं तथा विश्वास किया जाता है कि इन बीज मन्त्रों से महान् शक्तियां और सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

वेदों में मन्त्र को सर्वोच्च सत्ता एवं उन्हें ब्रह्म के समान माना है। आचार्य आपस्तम्ब कहते हैं मन्त्रब्राह्मणयोर्वेदनामधेयम् ।

शबर स्वामी अपने भाष्य में लिखते हैं-मन्त्र-वैशिष्ट्य क्या है? जो शब्द-राशि अलौकिक अर्थ प्रतीत कराती हो, जो नियत स्वर तथा वर्ण क्रम वैशिष्ट्य से युक्त हो और जिसे गुरुमुख से सुनने के पश्चात् शिष्य उच्चारण करता हो वे शब्दसमूह ही मन्त्र की श्रेणी में आते हैं।

मन्त्र की शक्ति व स्वरूप की व्याख्या करने पर यह कहा जा सकता है कि मन्त्र नाशरहित हैं, मन्त्र नित्य हैं, विभु हैं, सर्व व्यापक हैं, सूक्ष्म-से-सूक्ष्म हैं और सब भूतों की योनि हैं। जहां वाणी नहीं जा सकती, वहां मन्त्र जाते हैं।

मन्त्र के भीतर ऐसी गूढ़ शक्ति छिपी है जो वाणी से प्रकाशित नहीं की जा सकती अपितु उस शक्ति से वाणी स्वयं प्रकाशितं होती है। मन्त्रशक्ति अनुभवगम्य है, जिसे कोई चर्मचक्षुओं द्वारा नहीं देख सकता वरन् इसकी सहायता से चर्मचक्षु दीप्तिमान होकर त्रिकालदर्शी हो जाते हैं। मन्त्र आप्त वाक्यजन्य होते हुए भी इसकी शक्ति निर्वचनीय व शब्दातीत है।

कालान्तर में चुरादि धातुओं की तरह मंत्रयते, कभी-कभी मंत्रयति तथा मंत्रित शब्द दैनिक प्रयोग में आने लगे, जो कि सलाह लेना, विचार करना, परामर्श लेना, सोच-विचारकर संकल्प करना, गुप्त मन्त्रणा करना इत्यादि अर्थों में प्रयुक्त होने लगे।

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:अनुभूत यंत्र मंत्र तंत्र और टोटके | Anubhut Yantra Mantra Tantra Aur Totke
Author:Bhojraj Dwivedi
Total pages:225
Language: हिंदी | Hindi
Size:11 ~ MB
Download Status:Available


Anubhut Yantra Mantra Tantra Aur Totke written by Bhojraj Dwivedi | Ebook size 11 MB | Includes 225 Pages | Find the free PDF download link of “Anubhut Yantra Mantra Tantra Aur Totke” below and read it right away.

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