Free Hindi Book Khazane Ki Khoj In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
पूर्व के नगरों में सिंगापुर को एक विशेष महत्त्व प्राप्त है। कारण सिर्फ यह नहीं कि यह एक बहुत ही सुहावना और आकर्षक स्थान है, बल्कि इसलिए भी कि यहाँ रह कर मानव-प्रकृति की विविधता के निरीक्षण और अध्ययन के वे अनमोल अवसर उपलब्ध होते हैं जो किसी दूसरे स्थान पर प्राप्त नहीं हो सकते। यही बह शहर है जहाँ पूर्व और पश्चिम की सभ्यताएँ एक-दूसरे से मिलती हैं और जहाँ ब्रिटिश साम्राज्यवाद और चीनी शासन की अच्छाइयों और बुराइओं का मुकाबला सहज में किया जा सकता है। दुनिया की आधी से ज्यादा बोलियाँ इस शहर के बाजारों की आधे घंटे की सैर में बखूबी मुनी जा सकती हैं। और बहतरीन खुश्बू से बदतरीन बदबू तक कोई मजा ऐसा नहीं, जिससे यहाँ के बसने वालों ी नाक वंचित रह सके। पश्चिम के नाना प्रकार के पदार्थों से लेकर चीनियों के तले हुए चूहों तक कोई चीज ऐसी नहीं, जिसे त्रखने अथवा पेट भरने का मुसाफ़िर को अवसर प्राप्त न हो ।
बंदरगाहों में भी शानदार जहाज चीनी साम्पान, फ्रांस, ब्रिटेन और हालैंड के स्टीमर, कोयला की नावें और भार ढोने वाले बजरे पास-पास लंगर डाले नजर आते हैं और बर्बरता के युग से लेकर सभ्यता के आधुनिक युग तक की समुद्री यात्रा के विकास का शिक्षाप्रद दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इस शहर का पहला दृश्य हमेशा याद रहने वाला लेकिन अंतिम आमतौर पर यह भावना उत्पन्न करने बाला होता है कि भगवान दोबारा ऐसा बिनौना दृश्य न दिखाये ।
वही सौभाग्यशाली इस नगर में रह सकते हैं जो समुद्र की तरह गर्मी और मेंडक की तरह सर्दी के प्रभाव से सुरक्षित हों और जिनका स्वभाव ही कुछ ऐसा बन गया हो कि वे हवा, आँधी और तूफ़ान की आपत्तियों को महसूस ही न करते हों ।
कुछ दूसरी विशेषताओं के अलावा इस शहर की एक उल्लेखनीय विशेषता होटलों की अधिकता है। अभिप्राय होटल रीफिल्ज से कदाचित नहीं जिसमें विश्व-यात्री ठहरा करते हैं और न होटल डीला यूरोप से है जिसकी खूबियाँ बताने की जरूरत नहीं। यहाँ इशारा उन छोटी-छोटी गुमनाम सरायों की ओर है जो शहर के नामालूम कोनों और अँधेरी गलियों में इस तरह छिपी हुई हैं कि खुद सिंगापुर के रहने वाले भी उनसे पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसी ही एक पुरानी सराय जिसे उसके चतुर पुर्तगीजी मालिक ने 'तीन इच्छाओं' के होटल का शानदार नाम दे रखा था शहर के एक गुमनाम भाग में स्थित थी। मगर वे तीन इच्छाएँ जिन्हें इस जगह पूरा किया जाता था, क्या थीं, इसका हाल कुछ उन्हीं लोगों को मालूम होगा जिन्हें इसकी चारदीवारी में रहने का संयोग प्राप्त हुआ हो । बहरहाल इस तथ्य से किसी को इन्कार नहीं कि एक विशेष वर्ग के लोग जिनमें पूर्वी और पश्चिमी दोनों शामिल थे, यहाँ आकर ठहरते थे और इन नामालूम इच्छाओं की पूति से आनन्दित होते थे।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
|---|---|
| Name of Book: | खजाने की खोज | Khazane Ki Khoj |
| Author: | Tirthram Firojpuri |
| Total pages: | 202 |
| Language: | हिंदी | Hindi |
| Size: | 23 ~ MB |
| Download Status: | Available |
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