पंडित गोपीनाथ कविराज - Pt. Gopinath Kaviraj Books

गोपीनाथ कविराज: संक्षिप्त जीवनी

Gopinath Kaviraj (1887–1976) भारत के महान संस्कृत विद्वान, तंत्र-दर्शन के शोधकर्ता, योगी और दार्शनिक थे। उनका जन्म 7 सितंबर 1887 को धामराई (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। वे वाराणसी के गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य रहे और भारतीय दर्शन, तंत्र, योग तथा कश्मीर शैव दर्शन पर उनके गहन अध्ययन के लिए प्रसिद्ध हैं।

गोपीनाथ कविराज ने अपना अधिकांश जीवन काशी (वाराणसी) में साधना, शोध और अध्यापन में बिताया। वे योगिराज विशुद्धानंद परमहंस के शिष्य थे तथा बाद में आनंदमयी माँ के भी निकट रहे। 1964 में उन्हें भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।

प्रमुख पुस्तकें

  1. गुरु दर्शन से सम्बोधि (Guru Darshan Se Sambodhi)
  2. ज्ञानगंज (Jnanaganja / Gyanganj)
  3. अखण्ड महायोग
  4. क्रमसाधना
  5. अनन्त की ओर
  6. परातन्त्र साधना पथ
  7. शक्ति का जागरण और कुण्डलिनी
  8. रहस्यमय सिद्धभूमि तथा सूर्यविज्ञान
  9. योगिराज विशुद्धानन्द प्रसंग तथा तत्त्वकथा
  10. भारतीय संस्कृति और साधना
  11. तांत्रिक साधना और सिद्धांत
  12. तांत्रिक वाङ्मय में शक्तिदृष्टि
  13. श्रीकृष्ण प्रसंग
  14. काशी की सारस्वत साधना
  15. साधु दर्शन एवं सत्प्रसंग
  16. Aspects of Indian Thought
  17. Notes on Religion and Philosophy
  18. Selected Writings of M. M. Gopinath Kaviraj

साहित्यिक एवं आध्यात्मिक योगदान

गोपीनाथ कविराज ने भारतीय तंत्र, योग, वेदांत, भक्ति, कश्मीर शैव दर्शन और रहस्यवाद पर अद्वितीय कार्य किया। उनकी रचनाएँ केवल दार्शनिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि साधकों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी मानी जाती हैं। विशेष रूप से ज्ञानगंज, अखण्ड महायोग और गुरु दर्शन से सम्बोधि जैसी कृतियाँ आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय हैं।

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