भारत विभाजन के गुनहगार | BHARAT VIBHAJAN KE GUNAHGAR HINDI BOOK PDF FREE DOWNLOAD

Bharat Vibhajan Ke Gunahgar

Free Hindi Book Bharat Vibhajan Ke Gunahgar In Pdf Download

All New hindi book pdf free download, भारत विभाजन के गुनहगार | Bharat Vibhajan Ke Gunahgar download pdf in hindi | Rammanohar Lohiya Books PDF| भारत विभाजन के गुनहगार, Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Book PDF Download Summary & Review.

{tocify} $title={Table of Contents}

पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

मौलाना आजाद कृत 'इंडिया विन्स फ्रीडम' के परीक्षण की जो बात मेरे मन में उठी, उसे जब मैंने लिखना शुरू किया तो वह देश के विभाजन का एक नय वृतांत बन गया। यह वृतांत हो सकता है, बाह्य रूप में, संगतवार व कालक्रमवार न हो, जैसा कि दूसरे लोग इसे चाहते, लेकिन कदाचित यह अधिक सजीव व वस्तुनिष्ठ बन पड़ा है। छपाई के दौरान इसके प्रूफ देखते समय इसमें स्पष्ट हुए दो लक्ष्यों के प्रति मैं सतर्क हुआ। एक, गलतियों और झूठे तथ्यों को जड़ से धोना और कुछ विशेष घटनाओं और सत्य के कुछ पहलुओं को उजागर करना और दूसरा उन मूल कारणों को रेखांकित करना जिनके कारण विभाजन हुआ। इन कारणों में मैंने आठ मुख्य कारण गिनाए हैं। एक, ब्रितानी कपट, दो, कांग्रेस नेतृत्व क उतारवय, तीन, हिन्दू-मुस्लिम दंगों की प्रत्यक्ष परिस्थिति, चार, जनता में दृढ़त और सामर्थ्य का अभाव, पाँच, गाँधीजी की अहिंसा, छः, मुस्लिम लीग की फूटनीति, सात, आए हुए अवसरों से लाभ उठा सकने की असमर्थता और आठ, हिन्दू अहंकार।

श्री राजगोपालाचारी अथवा कम्युनिस्टों की विभाजन समर्थक नीति और विभाजन के विरोध में कट्टर हिन्दूवादी या दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी नीति को विशेष महत्त्व देने की आवश्यकता नहीं। ये सभी मौलिक महत्त्व के नहीं थे। ये सभी गम्भीर शक्तियों के निरर्थक और महत्त्वहीन अभिव्यक्ति के प्रतीक थे। उदाहरणार्थ, विभाजन के लिए कट्टर हिन्दूवाद का विरोध असल में अर्थहीन था, क्योंकि देश विभाजित करने वाली प्रमुख शक्तियों में निश्चित रूप से कट्टर हिन्दूवाद भी एक शक्ति थी। यह उसी तरह थी जैसे हत्यारा, हत्या करने के बाद अपने गुनाह मानने से भागे।

इस संबंध में कोई भूल या गलती न हो। अखण्ड भारत के लिए सबसे अधिक व उच्च स्वर में नारा लगाने वाले, वर्तमान जनसंघ और उसके पूर्व पक्षपाती जो हिन्दूवाद की भावना के अहिन्दू तत्त्व के थे, उन्होंने ब्रिटिश और मुस्लिम लीग की देश के विभाजन में सहायता की, यदि उनकी नियत को नहीं, बल्कि उनके कामों के नतीजों को देखा जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा। एक राष्ट्र के अन्तर्गत मुसलमानों को हिन्दुओं के नजदीक लाने के संबंध में उन्होंने कुछ नहीं किया। उन्हें एक दूसरे से पृथक् रखने के लिए लगभग सब कुछ किया। ऐसी पृथक्ता ही विभाजन का मूल-कारण है। पृथक्ता की नीति को अंगीकार करना साथ ही अखण्ड भारत की भी कल्पना करना अपने आप में घोर आत्मवंचना है यदि हम यह भी मान लें कि ऐसा करने वाले ईमानदार लोग हैं।

उनके कृत्यों के युद्ध के संदर्भ में अर्थ और अभिप्राय माना जाएगा जब कि वे उन्हें दबाने की शक्ति रखते हैं जिन्हें पृथक् करते हैं। ऐसा युद्ध असंभव है, कम से कम हमारी शताब्दी के लिए और यदि कभी यह संभव भी हुआ तो इसका कारण घोषणा न होगी। युद्ध के बिना, अखंड भारत और हिन्दू-मुस्लिम पृथक्ता की दो कल्पनाओं क एकीकरण, विभाजन की नीति को समर्थन और पाकिस्तान को संकटकालीन सहायता देने जैसा ही है। भारत के मुसलमानों के विरोधी पाकिस्तान के मित्र हैं जनसंघी और हिन्दू नीति के सभी अखंड भारतवादी वस्तुतः पाकिस्तान के सहायक हैं। मैं एक असली अखंड भारतीय हूँ। मुझे विभाजन मान्य नहीं है विभाजन की सीमारेखा के दोनों ओर ऐसे लाखों लोग होंगे, लेकिन उन्हें केवल हिन्दू या केवल मुसलमान रहने से अपने को मुक्त करना होगा, तभी अखंड भारत की आकांक्षा के प्रति वे सच्चे रह सकेंगे।

दक्षिण राष्ट्रवादिता की दो धाराएँ हैं, एक धारा ने विभाजन के विचार के समर्थन दिया, जबकि दूसरी ने इसका विरोध किया। जब ये घटनाएँ घटी, तब उनकी नाराज व खुश करने की शक्ति कम न थी, लेकिन वे घटनाएँ फलहीन. थीं महत्त्वहीन। दक्षिण राष्ट्रवादिता केवल शाब्दिक या शब्दहीन विरोध कर सकती थी, इसमें सक्रिय विरोध करने की ताकत न थी। अतः इसका विरोध समर्पण अथवा राष्ट्रीयता की मूलधारा से दूर होने में मिट गया। इसी तरह, दक्षिण राष्ट्रवादी विचार, जिसने विभाजन में मदद की, उसने थोड़ी भिन्न भूमिका भी अदा की, इस सत्य के बावजूद कि इसके भाषणों से असली राष्ट्रवादी बुरी तरह ऊब चुके थे। इस भाषणबाजी में प्रभाव की शक्ति न थी। दोष उसमें इसी का न था भारतीय जनता व भारतीय राष्ट्रवाद की पलायनवृत्ति, पंगुत्व, भग्नता और आत्मशक्ति की कमी का भी दोष था। दक्षिण राष्ट्रवादिता ने विभाजन का समर्थन और विरोध दोनों किया, यह उनके मूल-वृक्ष की निष्पर्ण शाखाएँ थीं। मुझे कभीकभी आश्चर्य होता है कि क्या देशद्रोही लोग भी कभी इतिहास बनाने में कोई मौलिक भूमिका अदा करते हैं। ऐसे लोग तिरस्करणीय होते हैं, इसमें कोई संशय नहीं, लेकिन वे क्या महत्त्वपूर्ण लोग हैं, मुझमें इसमें शक है। ऐसे देशद्रोहियों के काम अर्थहीन होंगे, यदि उन्हें पूरे समाज के गुप्त विश्वासघात का सहयोग न मिले।

इसी तरह कम्युनिस्ट-विश्वासघात ने कोई मौलिक भूमिका अदा नहीं की इससे कोई नतीजा नहीं निकला, नतीजे का कारण अन्यत्र है। विभाजन के कम्युनिस्ट समर्थन ने पाकिस्तान को नहीं बनाया। अधिक से अधिक, इसक भूमिका अण्डा सेने जैसी रही। अब तो कोई यह याद भी नहीं करता सिव कम्युनिज्म विरोधी बासी प्रचार-तर्क के रूप में। मैं तो कम्युनिस्ट-विश्वासघात के इस कपटी पहलू को क्षणिक मानता हूँ जिसका लोगों पर कोई प्रभाव नहीं है लेकिन दूसरे देशद्रोही ऐसे भाग्यशाली नहीं हैं। अच्छा तो यह होगा कि........

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:भारत विभाजन के गुनहगार | Bharat Vibhajan Ke Gunahgar
Author:Rammanohar Lohiya
Total pages:90
Language: हिंदी | Hindi
Size:3.6 ~ MB
Download Status:Available


Bharat Vibhajan Ke Gunahgar written by Rammanohar Lohiya | Ebook size 3.6 MB | Includes 90 Pages | Find the free PDF download link of “Bharat Vibhajan Ke Gunahgar” below and read it right away.

Hindi Book Categories
You May Also Like:
    Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Book PDF Download
    📌 Note: Link redirects to external source. Hindibook.in does not host files.
    Buy This Book

    अपनी भाषा हिंदी में विविध जानकारियां, ब्लॉग: https://blog.hindibook.in 
    Odia Library Book PDF Free Download:  https://www.odiabook.in/ New

    हमारी वेबसाइट से जुड़ें 
    Whatspp चैनलFollow Us 
    FacebookFollow Us 
    TwitterFollow Us
    Arattai चैनलFollow Us
    TelegramJoin Our Channel 
    InstagramFollow Us
    YouTube चैनलSubscribe Us

    About Hindibook.in

    Hindibook.In Is A Book Website Where You Can Download All Hindi Books In PDF Format.

    Note : The above text is machine-typed and may contain errors, so it should not be considered part of the book. If you notice any errors, or have suggestions or complaints about this book, please inform us.

    Keywords: Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Hindi Book Pdf, Hindi Book Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Pdf Download, Hindi Book Free Bharat Vibhajan Ke Gunahgar, Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Hindi Book by Rammanohar Lohiya Pdf, Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Hindi Book Pdf Free Download, Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Hindi E-book Pdf, Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Hindi Ebook Pdf Free, Bharat Vibhajan Ke Gunahgar Hindi Books Pdf Free Download.

    Post a Comment

    Previous Post Next Post