वैज्ञानिक मैगजीन | VAIGYANIK MAGAZINE HINDI FREE PDF DOWNLOAD

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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

वैज्ञानिक का यह अंक जनवरी-मार्च 2021 है. इस अंक में डॉ होमी भाभा विज्ञान लेख प्रतियोगिता 2020 के पुरस्कृत रचनाओं का समावेश किया गया है. इन रचनाओं में विविध वैज्ञानिक विषयों का समावेश किया गया है. डॉ मिनाक्षी पाठक द्वारा ग्राफीन और श्रीमती वी एल गिरि द्वारा जल संकट पर और जीएम फूड पर उत्तम सिंह का लेख बहुत ही वैज्ञानिक और ज्ञानवर्धक है. 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व के सभी विकसित देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही यह जल संरक्षण के महत्व पर ध्यान केंद्रित करता है. ग्राफीन दुनिया का सबसे पहला टू डाईमॅशनल पदार्थ है. इसके जरिए पूरी दुनिया से पानी की समस्या को समाप्त किया जा सकता है. इससे कागज की तरह मुड़ने वाला मोबाइल फोन भी बनाया जा सकता है. ग्राफीन विद्युत का तेज संवाहक है. शोधकर्ताओं का मानना है कि ग्राफीन भविष्य में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, जो पारदर्शी होने के बावजूद भी स्टील से 300 गुना अधिक मजबूत होता है. साथ ही इसके जरिए समुद्र के खारे पानी को भी मीठे जल में बदला जा सकता है. इसका मतलब ग्राफीन के जरिए पूरी दुनिया से पानी की समस्या को समाप्त किया जा सकता है. साथ ही ग्रेफी आर्सेनिक जल के कारण कैंसर जैसी बीमारी से भी आम लोगों को निजात मिल सकती है. 28 फरवरी को देश में विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है. यही वह दिन है जब देश के महान वैज्ञानिक सीवी रमन ने रमन प्रभाव' का आविष्कार किया था इस कार्य के लिए उनको 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

हिन्दी भाषियों में विज्ञान लेखकों में कमी आना एक चिंता का विषय है हिन्दी भाषियों में विज्ञान में महारत रखने वाले अधिकतर लोग हिन्दी में आदतन नहीं लिखते हैं. चूँकि पेशेवर वैज्ञानिक दिनभर अंग्रेजी में काम कर रहे हैं. उनके शोध पत्र अंग्रेजी में छपते हैं, उनके पास हिन्दी में लिखने का वक्त कम होता है. धीरे-धीरे वे हिन्दी में लिखने की क्षमता खो बैठते हैं. हिन्दी में ज्यादातर विज्ञान लेखन उनके द्वारा हो रहा है, जो खुद वैज्ञानिक नहीं है. वैज्ञानिकों का लिखा अक्सर अंग्रेजी से अनुवादित मिलता है. आने वाली पीढ़ियों में पढ़े-लिखे लोगों में भारतीय भाषाओं में विज्ञान पढ़ने-लिखने वाले लोग कम होते जा रहे है. यह सवाल उठाया जाए तो हमें बुनियादी तौर पर अलग ढंग से इस मुद्दे पर सोचना पड़ेगा कि विज्ञान क्या है? इसकी भाषा कैसी होनी चाहिए? इन सवालों के जवाब हमें पढ़ने या सीखने वाले को ध्यान में रखकर सोचना चाहिए. अपनी भाषाओं में विज्ञान पढ़ने-लिखने की रुचि लगातार कम होती रही है. दूरदराज इलाकों में भी बिजली पानी से लेकर शिक्षा और मनोरंजन तक हर पहलू में नई टेक्रोलॉजी हमारे चारों ओर विकसित है. हालाँकि वैज्ञानिक सोच के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता, पर नई टेक्नोलॉजी में आधुनिक विज्ञान की भाषा है. इसलिए अगर हमारी भाषाओं में विज्ञान लेखन नहीं होगा, तो ये भाषाएँ जिन्दा नहीं रह पाएँगी. चूँकि विदेशी शब्द अपने इतिहास और संस्कृति में हमसे सीधे तुरन्त नहीं जुड़ते हैं इसलिए लम्बे समय तक हमारा मानसिक विकास पिछड़ा रहेगा, इसलिए पहली बात तो यह है कि भाषाओं में विज्ञान लेखन का अनुपात बढ़ना चाहिए. इस वक्त हिन्दी के अखबारों में विज्ञान पर कोई विशेष पन्ना नहीं मिलता है. यह चिन्ता की बात है. विज्ञान संबंधित सम्पादकों की सोच की यह बहुत बड़ी समस्या है. देश भर में हजारों समर्पित लोग अपनी भाषाओं में विज्ञान लेखन कर रहे हैं, लेकिन उन्हे लेख प्रकाशन में उचित स्थान व सम्मान नहीं मिला रहा है, जो कुछ मानदेय मिलता है उससे संतोष करना पड़ता है. चंद रूपये मिलने भर से क्या होता है? हम सभी इस बात पर ध्यान दें. कुछ विज्ञान संचारक जो विभिन्न संस्थानों द्वारा सम्मानित हुए हैं, उन्हे विज्ञान लेखन में प्रोत्साहित करने के लिये उनके सम्मान को हम इस अंक में प्रकाशित कर रहें हैं. श्री नरसिंह राम, संयुक्त निदेशक (राजभाषा), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के प्रयास से भापअ केंद्र, मुंबई को नवी मुंबई नराकास से 2019-20 का राजभाषा........

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:वैज्ञानिक मैगजीन | Vaigyanik Magazine
Author:Shri Dinanath Singh
Total pages:87
Language: हिंदी | Hindi
Size:2.5 ~ MB
Download Status:Available


Vaigyanik Magazine written by Shri Dinanath Singh | Ebook size 2.5 MB | Includes 87 Pages | Find the free PDF download link of “Vaigyanik Magazine” below and read it right away.

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