Free Hindi Book Siddha Yoga Darshan In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
बाबा श्री गंगाईनाथजी योगी
बाबा श्री गंगाईनाथ जी का आश्रम, जामसर-बीकानेर (राजस्थान)
सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के पूज्य गुरुदेव बाबा श्री गंगाईनाथ योगी आईपंथी नाथ सन्यासी थे। उनका जन्म राजस्थान के ब्यावर जिले के सिरमा ग्राम में हुआ। वे बाल्यकाल से ही ईश्वर की भक्ति में लीन रहते थे। उनका प्रारम्भिक आराधना काल अस्थलबोहर अखाड़े (हरियाणा), बनारस व हिमाचल प्रदेश में बीता। उसके बाद राजस्थान के पाली जिले में काजलवास (ग्यारह नाथों की समाधि) नामक स्थान पर आराधना कर रहे नाथ योगी बाबा श्री भाऊनाथ जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से गंगाईनाथ जी को बुलाया तथा गुरु-पद व शक्तिपात दीक्षा की सम्पूर्ण सामर्थ्य प्रदान की।
कई वर्षों तक काजलवास में तपस्या करने के बाद बाबा श्री गंगाईनाथ जी ने बीकानेर के पास जामसर नामक स्थान पर रेत के टीले पर धूणा स्थापित कर लम्बे समय तक तपस्या की। फिर अप्रेल 1983 में अपनी योग शक्ति से बीकानेर रेलवे में कार्यरत श्री रामलालजी सियाग को बुलाकर, गुरुपद सौंपकर आदेश दिया कि "वैदिक दर्शन को विश्व दर्शन बनाना है।" तत्पश्चात् 31.12.1983 को जामसर में ही समाधिस्थ हो गये। वर्तमान में जामसर समाधि राजस्थान प्रदेश के बीकानेर शहर से 27 कि. मी. दूर श्रीगंगानगर मार्ग पर स्थित है।
जीवन परिचय
पूज्य सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग प्रवृतिमार्गी संत थे। उनका जन्म राजस्थान के नागौर जिले के छीला गांव में हुआ, जो उनका ननिहाल था। लेकिन उनका बाल्यकाल अपने पैतृक गाँव पलाना (जिला बीकानेर) में ही बीता। वे मात्र तीन वर्ष के थे तब उनके पिताजी का स्वर्गवास हो गया। निर्धन किसान परिवार से होने के कारण अनेक कष्ट सहते हुए उनकी पूज्य माताजी ने उनका पालन-पोषण किया। एक समय उन्हें अनाथालय में रहकर भी शिक्षा ग्रहण करनी पड़ी। शिक्षा के उपरांत श्री रामलालजी सियाग को भारतीय रेलवे में क्लर्क के पद पर नौकरी मिल गयी। 1967-68 में उनके जीवन में अचानक बदलाव आने लगे और विकट परिस्थितियों में उन्होने गायत्री मंत्र की आराधना की। पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता से की गई इस साधना के परिणाम स्वरूप 1 जनवरी 1969 की प्रातः वेला में उन्हें गायत्री (निर्गुण निराकार) की सिद्धि हो गई। इससे उनके पूरे शरीर में दिव्य प्रकाश उत्पन्न हो गया और वे आध्यात्मिक साधना मे पूर्ण समर्पित हो गये।
कई वर्षों की तपस्या और साधना के बाद स्वामी विवेकानन्द के लेख पढ़ते हुए उनके मन में गुरु धारण करने की प्रबल इच्छा हुई। देश के समकालीन प्रसिद्ध संतो व गुरुओं से मिलने के पश्चात् श्री सियाग ने 1983 में बीकानेर के पास जामसर में आराधना कर रहे नाथ योगी बाबा श्री गंगाईनाथजी को गुरु धारण कर लिया।
बाबा श्री गंगाईनाथ जी एक आईपंथी नाथ योगी थे। दिसम्बर 1983 में श्री गंगाईनाथ जी ब्रह्मलीन हो गए और श्री रामलालजी सियाग को गुरु पद सौंपकर यह आदेश दे दिया कि अब आगे का कार्य आपको करना है। इसके बाद गुरुदेव श्री सियाग की आध्यात्मिक साधना को गति मिली और बाबा श्री गंगाईनाथ जी योगी की अहैतुकी कृपा से वर्ष 1984 में गुरुदेव सियाग को भगवान् श्रीकृष्ण (सगुण साकार) की सिद्धि हो गई। इस प्रकार एक ही जीवन में, एक ही शरीर में रहते हुए गुरुदेव सियाग को ईश्वर के दोनों स्वरूपों निर्गुण निराकार (गायत्री) और सगुण साकार (श्रीकृष्ण) की सिद्धियाँ हो गयी। इन दोनों सिद्धियों के कारण गुरुदेव सियाग के शरीर का दिव्य रुपांतरण हो गया और उनमें लाखों लोगों को एक साथ शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण करके सम्पूर्ण मानवता में दिव्य रुपांतरण करने का सामर्थ्य आ गया। महर्षि अरविन्द के अनुसार जब एक व्यक्ति में दोनों सिद्धियाँ (सगुण साकार व निर्गुण निराकार) हो जायेगी तब समस्त मानवता का कल्याण हो जायेगा। अतः बाबा श्री गंगाईनाथ जी के अध्यात्मिक आदेश से गुरुदेव सियाग ने वर्ष 1986 में रेलवे से स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली तथा मानवता के कल्याण हेतु वर्ष 1990 से सार्वजनिक रूप से शक्तिपात-दीक्षा देना प्रारम्भ कर दिया।
इस दर्शन को विश्व दर्शन बनाने हेतु गुरुदेव ने 1993 में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर की स्थापना की। तब से आज तक करोड़ो लोग पूज्य गुरुदेव की कृपा से अध्यात्मिक रूप से चेतन हो चुके हैं।
निर्जला एकादशी के दिन 5 जून 2017 को सद्गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग ने मानव देह त्याग कर गोलोक वापसी कर ली, लेकिन अब मानव जाति के दिव्य रूपांतरण का कार्य उनकी वाणी और उनके चित्र के माध्यम से पूरे विश्व मे तेजी से बढ़ रहा है।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
|---|---|
| Name of Book: | सिद्ध योग दर्शन | Siddha Yoga Darshan |
| Author: | Shri Ramlal Ji Siyag |
| Total pages: | 20 |
| Language: | हिंदी | Hindi |
| Size: | 29 ~ MB |
| Download Status: | Available |
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