Free Hindi Book Mein Chanakya Bol Raha Hoon In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
पंद्रह वर्षीय एक बालक अपनी माँ के पास बैठा हुआ था। माँ ने अपने एकमात्र लाडले पुत्र की और देखकर कहा, "बेटा, हम बहुत गरीब हैं। तेरे पिता ने अत्यंत गरीबी में रहकर अपने दिन काटे हैं। तू ही अपने पिता और मेरी भावी आशाओं का केंद्र है। मैं चाहती हूँ कि तू अपने समय का एक आदर्श महापुरुष बने, इसलिए मैं नित्य नील सरस्वती की उपासना करती हूँ।"
अपनी माँ के प्रेरक वचन सुनकर बालक ने अत्यंत श्रद्धा से उनकी ओर देखा और उसे लगा कि उनके सामने साक्षात् नील सरस्वती ही खड़ी हैं।
बालक ने कहा, "मेरे लिए तो आप ही साक्षात् नील सरस्वती हैं। मैं आपके तथा पिताजी के विश्वास को झुठलाऊँगा नहीं।"
एक दिन एक ऐसी घटना घटी, जिसके कारण बालक की माँ अत्यंत उदास हो गई। एक ज्योतिषी उनके घर पथारे और अपने पुत्र के भविष्य के प्रति आश्वस्त होने के लिए माँ ने अपने पुत्र की जन्म-कुंडली उन्हें दिखलाई।
जन्म-कुंडली देखकर ज्योतिषी बोला, "मैंने आज तक ऐसी विलक्षण जन्म-कुंडली नहीं देखी। इस बालक की जन्म कुंडली में तो ग्रहों का ऐसा योग पड़ा है कि वह आगे चलकर यशस्वी चक्रवर्ती सम्राट् बनेगा।
यह भविष्यवाणी मिथ्या नहीं हो सकती। यदि इस कथन की सत्यता की जाँच करनी हो तो अपने पुत्र के सामने के दाँत को गौर से देखना। उस पर नागराज का विह्न अंकित होगा।"
प्रसन्न होने के स्थान पर माँ चिंतित हो गई और सोचने लगी कि चक्रवर्ती सम्राट् बन उनका पुत्र उन्हें व्यस्त होने के कारण समय नहीं दे पाएगा। पुत्र-वियोग की व्ािंता में उनकी आँखों में आँसू आ गए।
उसी समय बालक वहाँ आ गया और माँ की आँखों में आँसू देखकर कारण पूछा। बहुत हठ करने पर माँ ने अपने मन की आशंका को बालक के सामने प्रकट कर दिया।
बालक ने दर्पण में जाकर अपने दाँतों को देखा। वास्तव में वहाँ नागराज का विह्न अंकित था। उसने बिना किसी विलंब के एक पत्थर उठाया और एक ही प्रहार से उस दाँत को तोड़ दिया। बालक ने रक्त से सना दाँत उठाकर माँ के चरणों में रख दिया और कहा, "माँ, अब नागराज का चिह्न अंकित दाँत ही नहीं रहा तो मेरे चक्रवर्ती सम्राट् बनने का प्रश्न ही नहीं। मुझे तो मेरी माता का वात्सल्य ही चाहिए।"
माँ ने अपने पुत्र को सीने से लगा लिया।
यही बालक आगे जाकर 'चाणक्य' नाम से प्रसिद्ध हुआ। नागराज के चिह्नवाला दाँत टूट जाने से विष्णुगुप्त चाणक्य चक्रवर्ती सम्राट् तो नहीं बन सके, पर अपनी माँ के आशीर्वाद से चक्रवर्ती सम्राट्-निर्माता अवश्य ही बन गए और उनके नीतिशास्त्र पर अनेक चक्रवर्ती सम्राट् निछावर हो गए।
चाणक्य को भारत के एक महान् राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है। उनके पिता चणक मुनि एक महान् शिक्षक थे। कहा जाता है कि चाणक्य का जन्म तक्षशिला या दक्षिण भारत में 350 ई.पू. के आसपास हुआ था। उनकी मृत्यु का अनुमानित वर्ष 283 ई.पू. बताया गया है।
चाणक्य को विष्णुगुप्त, वात्स्यायन, मल्लनाग, पक्षिलस्वामी, अंगल, द्रमिल और कौटिल्य भी कहा जाता है। कहा जाता है कि पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं। यह बात चाणक्य पर शत प्रतिशत सही साबित होती है। जरा इन बातों पर गौर कीजिए-जन्म के समय से ही चाणक्य के मुँह में पूरे दाँत थे। यह राजा या सम्राट् बनने की निशानी थी।
लेकिन चूँकि उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था, इसलिए यह बात सच नहीं हो सकती थी। इसलिए उनके दाँत उखाड़ दिए गए और यह भविष्यवाणी की गई कि वे किसी और व्यक्ति को राजा बनवाएँगे और उसके माध्यम से शासन करेंगे। चाणक्य में जन्मजात नेतृत्वकर्ता के गुण मौजूद थे। वे अपने हमउम्र साथियों से कहीं अधिक बुद्धिमान और तार्किक थे।
चाणक्य कटु सत्य को कहने से भी नहीं चूकते थे। इसी कारण पाटलिपुत्र के राजा घनानंद ने उन्हें अपने दरबार से बाहर निकाल दिया था। तभी चाणक्य ने प्रतिज्ञा की थी कि वे नंद वंश का समूल नाश कर देंगे।
अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए चाणक्य ने बालक चंद्रगुप्त को चुना, क्योंकि उसमें जन्म से ही राजा बनने के सभी गुण मौजूद थे। चंद्रगुप्त के कई शत्रु थे। राजा नंद भी उनमें शामिल था। उसने चंद्रगुप्त को कई बार जहर देकर मारने की कोशिश की। अतः चंद्रगुप्त की जहर-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए तरा ने उसे भोजन में थोड़ा-थोडा जहर मिलाकर देला आरंभ कर दिया।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
|---|---|
| Name of Book: | मैं चाणक्य बोल रहा हूँ | Mein Chanakya Bol Raha Hoon |
| Author: | Mahesh Sharma |
| Total pages: | 83 |
| Language: | हिंदी | Hindi |
| Size: | 0.9 ~ MB |
| Download Status: | Available |
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