Free Hindi Book Marie Curie In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
'वैज्ञानिक' शब्द सुनते ही मन में कैसी तस्वीर बनती है? शायद एक गंभीर सा, चश्मा लगाए गहरे सोच-विचार में खोए पुरुष की। किसी हंसमुख महिला का चेहरा तो इस शब्द के साथ कभी जुड़ ही नहीं पाता। भला ऐसा क्यों? तुम शायद कहो कि महिलाएं वैज्ञानिक होती ही नहीं हैं। पर वास्तव में ऐसी बात नहीं है। हां, यह सच है कि पुरुषों की तुलना में बहुत कम। पर इससे एक और सवाल उभरता है कि ऐसा क्यों? यह भी कतई सच नहीं है कि महिलाओं में बुद्धि या कौशल की कमी होती है। पर अक्सर ऐसा कहा जाता है कि उनमें विज्ञान के प्रति रुचि नहीं होती। वास्तव में इन धारणाओं के पीछे सामाजिक कारणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बचपन से ही लड़की को घर-गृहस्थी के कामों में ज़्यादा डाला जाता है। उनके लिए घर-चूल्हा या गुड्डा-गुड्डी के खेल ही उचित समझे जाते हैं। आमतौर पर हर बात का एक ही जवाब होता है, 'ऊंह, लड़की है। उसे तो आखिर किसी का घर ही संभालना है। बस घर-गृहस्थी की चीजें सीख ले। वही काम आएंगी।' दूसरी तरफ लड़कों को हर ऐसे काम में डाला जाता है जिन्हें वे करना चाहते हैं। चाहे फिर वह साइकिल चलाना हो या बिजली का फ्यूज़ ठीक करना। बिजली का फ्यूज़ ठीक करना लड़के के लिए एक आवश्यक प्रशिक्षण है और लड़की के लिए जान का खतरा। इसी तरह पढ़ाई या अन्य ऐसे कार्य जिनमें सोचने-समझने या दिमाग लगाने की बात है शुरू से ही लड़कों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। लड़कियों के पल्ले बस वही घर का काम, बच्चों को देखभाल आदि।
तो जब समाज ने बचपन से ही ऐसा बंटवारा कर दिया है तो फिर भला लड़कियों को कहां मौका मिलेगा-वैज्ञानिक बनने का, कई साल सतत् पढ़ाई करने या शोध कार्य करने का। और फिर इन सब चीज़ों के लिए स्कूल और कॉलेजों की प्रयोगशाला, लायब्रेरी आदि में भी अतिरिक्त समय लगाना पड़ता है। इसके लिए सामाजिक बंधनों से मुक्ति आवश्यक है। आखिर घर से बाहर पढ़ने जाना, लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देर तक काम करना, जल्दी व्याही न जाना, घर के रोज़मर्रा के कामों में परिवार के पुरुष सदस्यों का सहयोग चाहना, काम के सिलसिले में अकेले शहर से बाहर जाना, यात्रा करना- ये सभी बातें समाज के सामान्य रीति रिवाज़ों के विपरीत ही तो मानी जाती हैं।
वे महिलाएं जो इस ढर्रे से हटकर, स्वतंत्र होकर अपना विकास या काम कर पाई, जिन्होंने सदियों से प्रतिबंधित पुरुषों की जागीरदारी में कदम रखने का साहस उठाया; सफल हुईं। मादाम क्यूरी भी ऐसी ही एक महिला है जिसने अनेकों रुकावटों को लांघकर विश्व में एक सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक के रूप में अपने को स्थापित किया। और दिखाया कि 'वैज्ञानिक' फ्रेम में एक प्यारा-सा हंसता हुआ भोला चेहरा भी अच्छी तरह फिट होता है।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
|---|---|
| Name of Book: | मारी क्यूरी | Marie Curie |
| Author: | Gita Bandopadhyaya |
| Total pages: | 24 |
| Language: | हिंदी | Hindi |
| Size: | 0.6 ~ MB |
| Download Status: | Available |
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